Tuesday, 21 October 2014

Thoughts on Child Psychology

Golden Thoughts on Child Psychology:-

कुछ सुनहरे विचार:

1. If your child lies to you often, it is because you over-react too harshly to their inappropriate behavior.

यदि आपकी संतान आपसे अक्सर झूठ बोले , इसका कारण उनके अनुचित व्यवहार के लिए आपके द्वारा की गई कठोर प्रतिक्रिया होती है ।

2. If your child is not taught to confide in you about their mistakes, you've lost them.

यदि आपकी संतान उनके द्वारा की गई गुप्त ग़लतियों को आपसे सहभागी नहीं करती है , तो आपने उन्हें खो दिया है ।

3. If your child has poor self-esteem, it is because you advise them more than you encourage them.

यदि आपकी संतान में आत्म-सम्मान की कमी है तो इसका कारण आप उन्हें प्रोत्साहन से ज्यादा सलाह देते हैं ।

4. If your child does not stand up for themselves, it is because from a young age you have disciplined them regularly in public.

यदि आपकी संतान का आत्मविश्वास कमज़ोर है तो इसका कारण आपके द्वारा उनके साथ कम उम्र में सार्वजानिक रूप से किया गया कठोर अनुशासन है ।

5. If your child takes things that do not belong to them, it is because when you buy them things, you don't let them choose what they want.

यदि आपकी संतान अनचाही वस्तुओं को भी अपना लेती है तो इसका कारण आप उनकी मनचाही वस्तुओं को चुनने में उनकी राय नहीं लेते।

6. If your child is cowardly, it is because you help them too quickly.

यदि आपकी संतान कायर है तो इसका कारण आपका उनकी मदद के लिए अत्यधिक तत्पर रहना है ।

7. If your child does not respect other people's feelings, it is because instead of speaking to your child, you order and command them.

यदि आपकी संतान अन्य लोगों की भावनाओं का सम्मान नहीं करती है तो इसका कारण आपका उन्हें बात कर समझाने के बजाय आदेशात्मक रवैया होता है ।

8. If your child is too quick to anger, it is because you give too much attention to misbehavior and you give little attention to good behavior.

यदि आपकी संतान को क्रोध जल्दी आता है तो इसका कारण आपका ध्यान उनके सद्व्यवहार से ज्यादा उनके दुर्व्यवहार पर केंद्रित है ।
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9. If your child is excessively jealous, it is because you only congratulate them when they successfully complete something and not when they improve at something even if they don't successfully complete it.

यदि आपकी संतान ईर्ष्यालु है तो इसका कारण आपका उनके पूर्ण सफल होने पर ही बधाई का पात्र मानना है परन्तु उनके आंशिक सफल एवं स्वयं सुधार होने की कोशिश पर नहीं।

10. If your child intentionally disturbs you, it is because you are not physically affectionate enough.

यदि आपकी संतान जानबूझकर आपको परेशान करे तो इसका कारण उनके प्रति आपके भौतिक स्नेह का अभाव है ।

11. If your child is openly defiant, it is because you openly threaten to do something but don't follow through.

यदि आपकी संतान को सार्वजनिक रूप से उद्दंडता करने की आदत है तो इसका कारण आपके द्वारा खुलेआम कुछ करने की धमकी देना परन्तु कहे गए वचनों का पालन नहीं करना है।

12. If your child is secretive, it is because they don't trust that you won't blow things out of proportion.

यदि आपकी संतान व्यवहार में गोपनीयता रखती है तो इसका कारण उनके मन में आपके प्रति यह विश्वास की कहीं विचार ज़ाहिर होने पर आप उनके साथ क्रोधजनित व्यवहार तो नहीं करेंगे ।

13. If your child talks back to you, it is because they watch you do it to others and think its normal behavior.

यदि आपकी संतान आपके पीठ पीछे बात करती है तो इसका कारण उनकी नज़रों के सामने आपके द्वारा यही व्यवहार दूसरों के प्रति करना है और फिर उसे सामान्य समझना है ।

14. If your child doesn't listen to you but listens to others, it is because you are too quick to make decisions.

यदि आपकी संतान आपकी बात न मानकर दूसरों की सुनती है तो इसका कारण आपका अक्सर त्वरित निर्णय लेने की आदत हो सकती है ।

15. If your child rebels, it is because they know you care more about what others think than what is right or wrong.

यदि आपकी संतान अक्सर आपका विरोध करे तो इसका कारण है की वो यह जानते हैं की आप दूसरों की सोच का ध्यान में रखकर ही निर्णय लेते हैं फिर चाहे वो सही हो या नहीं।  

Change starts at home. Try a few if not all and see the sea change in the relations.

बदलाव की प्रक्रिया घर से शुरू होती है. सब नहीं तो कुछ सुनहरे विचार अपनाने की कोशिश करें और फिर संबंधों में बड़ा परिवर्तन देखें ।

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Tirukkural  by Tiruvalluvar ( a Tamil  poet/writer) was written more than 5000 yrs ago. It's one of the ancient science on Human behaviour , which has not changed in spite of modern education  & technology !

तिरुक्कुरल द्वारा तिरुवल्लुवर (एक तमिल कवि / लेखक) :
5000 साल से अधिक पहले लिखा गया था. यह मानव व्यवहार पर आधारित एक प्राचीन विज्ञान है जो आधुनिक शिक्षा और प्रौद्योगिकी के बावजूद नहीं बदला है.
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